ज़िन्दगी और खुशियां

(◍•ᴗ•◍)

ज़िन्दगी और खुशियों की जोड़ी तो बस ऐसी है जैसे फूल और उसकी महक की
जैसे चित्र और उसमें भरने वाले रंग की
जैसे कागज़ के पन्ने की और उसपे लिखी शायरी की
जिस तरह फूल महक के बिना
चित्र रंग के बिना
और एक पन्ना शायरी के बिना बेकार है
बस वैसे ही ज़िन्दगी खुशियों के बिना बेकार है।

यह खुशियां वोह है जो किसी के पास खुद ब खुद नहीं चलके आती
बल्कि खुशियों को तो हमें खुद ढूंढ़ना पड़ता है,
ज़िन्दगी वो पत्र नहीं जिसपे खुशियों के समान शब्द या नज़्म कोई और लिख के आपके पते पे भेज दे,
बल्कि ज़िन्दगी तो वह कोरा पन्ना है
जिसपे खुशियों के समान शब्द और नज़्म हमें खुद ही उतारना पड़ता है।

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