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ज़िन्दगी और खुशियां

(◍•ᴗ•◍) ज़िन्दगी और खुशियों की जोड़ी तो बस ऐसी है जैसे फूल और उसकी महक की जैसे चित्र और उसमें भरने वाले रंग की जैसे कागज़ के पन्ने की और उसपे लिखी शायरी की जिस तरह फूल महक के बिना चित्र रंग के बिना और एक पन्ना शायरी के बिना बेकार है बस वैसे ही ज़िन्दगी खुशियों के बिना बेकार है। यह खुशियां वोह है जो किसी के पास खुद ब खुद नहीं चलके आती बल्कि खुशियों को तो हमें खुद ढूंढ़ना पड़ता है, ज़िन्दगी वो पत्र नहीं जिसपे खुशियों के समान शब्द या नज़्म कोई और लिख के आपके पते पे भेज दे, बल्कि ज़िन्दगी तो वह कोरा पन्ना है जिसपे खुशियों के समान शब्द और नज़्म हमें खुद ही उतारना पड़ता है।

एक अनजान शख़्स

बचपन में मेरी एक अनजान शख़्स से मुलाक़ात हुई जो हर वक्त मेरे साथ रहता है पर अंधेरे में न जाने कहां गायब हो जाता है बड़ा ही अजीब है यह शख़्स पर एकदम काला है इस कारण उसका चेहरा न देख पाया हरपल मेरा साथ देना मानो उसका धर्म हो। हर पल साथ देता मरेको कभी अकेला महसूस होने न देता, उसकी फितरत ही कुछ ऐसी है की भले ही कुछ ना बोलता हो पर मेरे सभी दुखों को मानो सोख सा लेता है कोई भी मुसीबत में मेरे साथ खड़े होना मानो उसका कर्तव्य हो पर एक कमी है उसमें ज़िन्दगी में मेरा साथ तो देता है पर जब सच्में अंधेरा आता है तो मानो गायब सा हो जाता है। यह अनजान शख़्स की खोज तो मैं आज तक ना कर पाया पर दुनिया वाले उसे परछाया के नाम से जानते है।