एक अनजान शख़्स




बचपन में मेरी एक अनजान शख़्स से मुलाक़ात हुई
जो हर वक्त मेरे साथ रहता है
पर अंधेरे में न जाने कहां गायब हो जाता है
बड़ा ही अजीब है यह शख़्स
पर एकदम काला है इस कारण उसका चेहरा न देख पाया
हरपल मेरा साथ देना
मानो उसका धर्म हो।

हर पल साथ देता
मरेको कभी अकेला महसूस होने न देता,
उसकी फितरत ही कुछ ऐसी है की
भले ही कुछ ना बोलता हो पर
मेरे सभी दुखों को मानो सोख सा लेता है
कोई भी मुसीबत में मेरे साथ खड़े होना मानो उसका कर्तव्य हो
पर एक कमी है उसमें
ज़िन्दगी में मेरा साथ तो देता है
पर जब सच्में अंधेरा आता है तो मानो गायब सा हो जाता है।
यह अनजान शख़्स की खोज तो मैं आज तक ना कर पाया
पर दुनिया वाले उसे परछाया के नाम से जानते है।

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